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भारत ने शुरू किया UN सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यता के लिए अभियान, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर

 Published : Jul 14, 2026 09:22 am IST,  Updated : Jul 14, 2026 10:50 am IST

भारत ने यूनाइडेट नेशन सिक्योरिटी काउंसिल यानी UNSC में अस्थाई सदस्यता के लिए 2028-29 के कार्यकाल के लिए दावेदारी पेश कर दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसके साथ ही UN में सुधार की मांग उठाई है।

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एस जयशंकर ने की UN महासचिव एंटोनियो गुटरेस से मुलाकात। Image Source : X (@DRSJAISHANKAR)

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के अस्थायी सदस्यता के लिए अपना अभियान किया शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार, भारत ने UNSC के अस्थाई सदस्य के तौर पर 2028-29 के कार्यकाल के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस के साथ मुलाकात की है। इस दौरान दोनों के बीच पश्चिम एशिया, यूक्रेन और रूस युद्ध सहित कई ग्लोबल मुद्दों पर हुई चर्चा हुई है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने शुरू किया कैंपेन

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित प्रोग्राम में अलग-अलग देशों के राजदूतों, राजनयिकों और UN के सीनियर अधिकारियों की मौजूदगी में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने UNSC के लिए भारत के कैंपेन की शुरुआत की। जयशंकर ने कहा कि कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण 'SHANTI' के सिद्धांत पर आधारित है। अपने संबोधन में एस जयशंकर ने शांतिपूर्ण दुनिया पर जोर देते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य एक ऐसे विश्व के निर्माण में योगदान देना है, जहां शांति, सुरक्षा और समानता हो।

कब होंगे चुनाव?

जानकारी के अनुसार, UNSC की 2028-29 की अवधि के लिए अस्थायी सीट के लिए चुनाव का आयोजन अगले साल जून महीने में होगा। भारत लंबे समय से UN में सुधार और नए स्थायी सदस्यों को जोड़ने की मांग करता रहा है। बड़ी संख्या में देश भारत की इस मांग का समर्थन भी करते हैं।

दुनिया गहरे विरोधाभास का सामना कर रही- जयशंकर

UN मुख्यालय में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा- "आज आप सबके साथ जुड़कर मुझे बेहद खुशी हो रही है। हम 2028-29 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्य के रूप में भारत की उम्मीदवारी की घोषणा कर रहे हैं। हम ऐसा ऐसे समय में कर रहे हैं जब दुनिया एक गहरे विरोधाभास का सामना कर रही है। मानव कल्याण को इतने बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने की अपार क्षमताएं पहले कभी दुनिया के पास नहीं थीं। वहीं दूसरी ओर, हम संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता के ऐसे स्तर देख रहे हैं जो दूर-दराज के लोगों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। इस जटिलता से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र को नेतृत्व करना होगा और इसके फलस्वरूप सुरक्षा परिषद के सदस्यों के चुनाव का महत्व बढ़ जाता है।"

एस जयशंकर ने आगे कहा- "एक उम्मीदवार के रूप में, यह स्वाभाविक है कि सदस्य देश यह समझना चाहेंगे कि भारत क्या योगदान दे सकता है। इसका एक हिस्सा उन प्राथमिकताओं के बारे में हमारी दूरदृष्टि है जिन पर दुनिया और संयुक्त राष्ट्र को ध्यान देना चाहिए। दूसरा हिस्सा हमारा ऐसा पूर्व-कार्य अनुभव है जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपना निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।"

'पूरी दुनिया एक परिवार है' भारत की सोच- जयशंक

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा- "जब भारत 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी 'पूरी दुनिया एक परिवार है' की सोच को अपनाता है तो हम सिर्फ उपदेश नहीं देते; हम इसे असल में अपनाते भी हैं। दुनिया की भलाई में हमारे योगदान के कुछ हालिया उदाहरण ये हैं: पहला, समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भारत बड़े पैमाने पर और लगातार योगदान देता है, जिसमें पायरेसी-रोधी, नशीले पदार्थों को रोकने और मानव तस्करी के खिलाफ ऑपरेशन शामिल हैं। फ्यूज़न सेंटर के अलावा हमारी सेनाएं इंडो-पैसिफिक इलाके में समुद्री रास्तों की सुरक्षा कर रही हैं, खासकर उत्तरी और दक्षिणी अरब सागर, अदन की खाड़ी, मलक्का जलडमरूमध्य और गिनी की खाड़ी में भी। शांति बनाए रखने का हमारा लंबा अनुभव अब 'दिल्ली सेंटर ऑफ ह्यूमैनिटेरियन पीसकीपिंग' के ज़रिए 98 देशों को ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण की सुविधा देने तक बढ़ गया है।"

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